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पेड़ों का महत्व: जब अंश ने देखा बिना पेड़ों वाला भयानक भविष्य:- बच्चों, क्या आपने कभी सोचा है कि अगर आपके घर के आसपास के सारे हरे-भरे पेड़ अचानक गायब हो जाएं, तो दुनिया कैसी दिखेगी? हम अक्सर वृक्षारोपण (Tree Planting) की बातें तो करते हैं, लेकिन असल में पौधों को सिर्फ़ सजावट की चीज़ समझते हैं। यह कहानी 'ग्रीन वैली सोसाइटी' के एक शरारती लड़के अंश की है। अंश को फूलों को मसलने और पौधों को तोड़ने में बड़ा मज़ा आता था। लेकिन एक दोपहर, उसे एक ऐसा सपना आया जिसने उसकी रूह कंपा दी। यह कहानी पेड़ों का महत्व को एक रोमांचक और लॉजिकल तरीके से समझाती है।
कहानी: पेड़ों का महत्व
अंश की नादानी
दोपहर के 2 बज रहे थे। स्कूल बस ने सोसाइटी के गेट पर अंश को छोड़ा। 10 साल का अंश बैग लटकाए हुए घर की तरफ जा रहा था। रास्ते में सोसाइटी का सुंदर बगीचा पड़ता था। माली काका ने वहां बड़ी मेहनत से गेंदे और गुलाब के नए पौधे लगाए थे।
अंश की नज़र उन ताज़े फूलों पर पड़ी। उसे न जाने क्या सूझी, उसने अपनी पानी की बोतल से बचा हुआ पानी उन पर नहीं डाला, बल्कि डंडे से उन फूलों को मारना शुरू कर दिया। चटाक! एक सुंदर लाल गुलाब टूटकर नाली में गिर गया। अंश हँसा, "हा हा! कितना मज़ा आया!"
वह आगे बढ़ा और एक छोटे से आम के पौधे को, जिसे उसके पापा ने पिछले हफ़्ते ही लगाया था, पैर से कुचल दिया। अंश के लिए यह सिर्फ़ एक खेल था। घर पहुँचते ही उसकी मम्मी, सुधा जी, ने उसे देखा। उसके जूतों पर कीचड़ और हाथों में कुचली हुई पत्तियां थीं।
"अंश! तुमने फिर पौधों को नुकसान पहुँचाया?" मम्मी ने गुस्से और दुःख के साथ पूछा। "बेटा, पेड़ भी सांस लेते हैं, उन्हें दर्द होता है।" अंश ने बैग सोफे पर फेंका और लापरवाही से बोला, "ओह मम्मी! प्लीज लेक्चर मत दो। वो बस घास-फूस हैं। मुझे भूख लगी है, खाना दो।"
अंश ने खाना खाया, लेकिन उसे अपनी गलती का ज़रा भी अहसास नहीं था। एसी (AC) की ठंडी हवा में वह रजाई ओढ़कर गहरी नींद में सो गया। लेकिन कुछ ही देर बाद, उसका सुकून एक खौफनाक सपने में बदलने वाला था।
भविष्य का बंजर रेगिस्तान
सपने में अंश की आँख खुली। उसे लगा कि एसी बंद हो गया है क्योंकि उसे भयानक गर्मी लग रही थी। उसने उठकर देखा, तो वह अपने बेडरूम में नहीं था। वह एक अजीब सी जगह पर खड़ा था। जहाँ तक नज़र जा रही थी, सिर्फ़ लाल और भूरी ज़मीन थी। न कोई घर था, न कोई सड़क, और न ही कोई पेड़।
सूरज आग के गोले की तरह तप रहा था। अंश का गला प्यास से सूख रहा था। "मम्मी! पापा!" वह चिल्लाया। लेकिन वहां सिर्फ़ हवा की सांय-सांय थी।
अंश चलने लगा। उसके पैर जल रहे थे। उसने देखा कि ज़मीन पर जगह-जगह दरारें पड़ी हैं। वहां कुछ कंकाल (Skeletons) पड़े थे जो जानवरों के लग रहे थे। अंश डर के मारे कांपने लगा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह कहाँ आ गया है। उसे एक भी हरी पत्ती या घास का तिनका नज़र नहीं आ रहा था।
"पानी... कोई मुझे पानी दे दो..." अंश बुदबुदाया।
सांसों का सौदा
भागते-भागते अंश को एक खंडहर दिखाई दिया। वहां कुछ लोग बैठे थे। उनकी हालत बहुत खराब थी। उनके कपड़े फटे हुए थे और सबके चेहरों पर ऑक्सीजन मास्क लगे हुए थे। वे लोग एक-एक सांस के लिए तड़प रहे थे।
अंश उनके पास गया। "अंकल, यह कौन सी जगह है? और यहाँ इतना सन्नाटा क्यों है?" एक बूढ़े आदमी ने अपनी खांसी रोकी और इशारा किया। उसकी आँखों में गहरा दर्द था। उसने एक मशीन की तरफ इशारा किया जो गंदा पानी बूंद-बूंद करके टपका रही थी। लोग उस एक बूंद के लिए लड़ रहे थे।
बूढ़े आदमी ने बड़ी मुश्किल से मास्क हटाकर कहा, "बेटा, यह धरती ही है... साल 2080 की धरती।" अंश चौंक गया। "क्या? लेकिन मेरे घर के पास तो बहुत पेड़ थे, बगीचा था..."
बूढ़े ने कड़वी हँसी हँसी। "पेड़? वो तो किस्सों में बचे हैं। तुम लोगों ने अपने मज़े के लिए, सड़कों के लिए और इमारतों के लिए सारे जंगल काट दिए। तुमने सोचा कि एसी और फ्रिज तुम्हें बचा लेंगे? जब पेड़ ही नहीं बचे, तो बारिश बंद हो गई। नदियाँ सूख गईं। और अब... अब हमारे पास न पीने को पानी है, न सांस लेने को हवा।"
प्रकृति का लॉजिक (The Science)
अंश को अपने स्कूल की साइंस क्लास याद आ गई। टीचर ने बताया था कि पेड़ मिट्टी को पकड़कर रखते हैं और बादलों को बारिश के लिए बुलाते हैं। उसने सोचा, "ओह नहीं! मैंने आज ही तो वो पौधा कुचला था। क्या मेरी वजह से यह सब हुआ?"
तभी वहां एक तेज़ गर्म हवा का तूफ़ान (Heatwave) आया। लोग चीखने लगे। बूढ़े आदमी ने अंश का हाथ पकड़ा। उसका हाथ एकदम सूखा और हड्डियों का ढांचा था। "देखो बेटा!" बूढ़े ने कहा, "यह जो तुम देख रहे हो, यह उन 'खेलों' का नतीजा है जो तुम जैसे बच्चों ने पौधों के साथ खेले थे। तुमने प्रकृति को मारा, अब प्रकृति हमें मार रही है।"
अंश रोने लगा। उसे अपनी मम्मी की बात याद आई—"पेड़ भी सांस लेते हैं।" आज उसे समझ आ रहा था कि पेड़ सिर्फ़ सांस नहीं लेते, बल्कि हमें सांस देते भी हैं। "मुझे माफ़ कर दो! मुझे घर जाना है! मैं सब ठीक कर दूंगा!" अंश ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा। "मैं अब कभी पेड़ नहीं तोडूंगा!"
तभी वह बूढ़ा आदमी एक रौशनी में बदल गया और एक गूंजती हुई आवाज़ आई: "जागो अंश! अभी भी वक्त है। अपने आज को सुधारो, वरना यही तुम्हारा कल होगा।"
पश्चाताप और नई सुबह
"नहीं! नहीं!" चिल्लाते हुए अंश हड़बड़ाकर उठ बैठा। उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। उसने इधर-उधर देखा। वह अपने कमरे में था। खिड़की से शाम की ठंडी हवा आ रही थी और बाहर नीम के पेड़ के पत्ते हिल रहे थे।
अंश बिस्तर से कूदा और सीधा बालकनी में भागा। उसने उस नीम के पेड़ को देखा और उसे जाकर गले लगा लिया। उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे। "थैंक यू... थैंक यू कि तुम यहाँ हो," वह पेड़ से बातें करने लगा।
सुधा जी घबराकर वहां आईं। "क्या हुआ अंश? तुम रो क्यों रहे हो?" अंश ने मम्मी को कसकर पकड़ लिया। "मम्मी, मैंने बहुत बड़ी गलती की। मैंने आज बगीचे के फूल तोड़े और पापा का पौधा कुचल दिया। मुझे बहुत डर लग रहा है कि कहीं सब ख़त्म न हो जाए।"
मम्मी ने उसे शांत किया। अंश ने कहा, "मम्मी, मुझे अभी बगीचे में जाना है।"
निष्कर्ष: नन्हा रक्षक
उस शाम, सोसाइटी के लोगों ने एक अजीब नज़ारा देखा। वही अंश, जो कल तक फूल तोड़ता था, आज माली काका के साथ मिलकर टूटे हुए पौधे की मरहम-पट्टी कर रहा था। उसने अपनी पॉकेट मनी से एक नया पौधा खरीदा और उसी जगह लगाया जहाँ उसने पुराना पौधा कुचला था।
अंश ने अपने दोस्तों की एक 'ग्रीन आर्मी' बनाई। अब उनका काम पौधों को तोड़ना नहीं, बल्कि हर रविवार नए पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना था। अंश समझ चुका था कि यह सिर्फ़ पेड़ नहीं, बल्कि उसकी आने वाली ज़िंदगी की सांसें हैं।
इस कहानी से सीख (Moral)
इस कहानी से हमें यह महत्त्वपूर्ण सीख मिलती है:
पेड़ हैं तो जीवन है: हमें सिर्फ़ अपने आज के मज़े के लिए प्रकृति को बर्बाद नहीं करना चाहिए।
सुधार की शुरुआत: गलती करना बुरा है, लेकिन उसे समय रहते सुधार लेना ही असली समझदारी है।
Spin Titles (3 Options)
अंश का डरावना सपना: जब धरती से पेड़ गायब हो गए
2080 की दुनिया: एक बूंद पानी और आखिरी सांस
उजड़ा बगीचा और अंश का पश्चाताप: पेड़ों का महत्व
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